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अटलांटिक महासागर में 175 साल बाद थमे चक्रवात और बदला मौसम तंत्र

Furacão Karina se formando próximo da Califórnia - X/Reprodução
Furacão Karina se formando próximo da Califórnia - X/Reprodução

अटलांटिक महासागर में सितंबर के दौरान चक्रवातों की अनुपस्थिति ने दुनिया भर के वायुमंडलीय संतुलन पर गहरा प्रभाव डाला है। इस असामान्य मौसमी शांति के कारण वैश्विक स्तर पर मौसम की सामान्य चाल बाधित हुई है।

यह समुद्री क्षेत्र 10 सितंबर की सामान्य सांख्यिकीय सीमा पार कर चुका है, लेकिन यहां किसी उष्णकटिबंधीय तूफान की पुष्टि नहीं हुई। गहरे पानी के भीतर ऐसी कोई हलचल पैदा नहीं हुई जो भीषण तूफानों को जन्म दे सके। विशाल जलक्षेत्र में चक्रवाती तंत्र पूरी तरह गायब रहा।

समुद्र का तापमान उष्णकटिबंधीय इलाकों में रिकॉर्ड स्तर तक गर्म रहने के बावजूद सहारा से उठी धूल और हवा के तीव्र दबाव ने तूफानों के उभार को रोक दिया। इन विपरीत परिस्थितियों ने समुद्री जलवायु के पारंपरिक नियमों को तोड़ दिया है।

चक्रवातों के न आने से तटीय बस्तियों को गंभीर बाढ़ और तबाही से फौरी राहत मिली है। मेक्सिको की खाड़ी में बने शांत माहौल ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तेल और गैस की कीमतों को अचानक बढ़ने से भी रोका। बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य बना रहा।

अटलांटिक में यह स्थिति ऐतिहासिक है।

अमेरिकी वायु निगरानी तंत्र ने 1944 में मेक्सिको की खाड़ी और कैरेबियाई सागर के ऊपर नियमित गश्त शुरू की थी, जिसके बाद से प्रत्येक वर्ष 11 सितंबर तक कम से कम एक बड़ा तूफान अवश्य दर्ज किया जाता रहा, जिसमें 2002 का Gustav और 2013 का Humberto सबसे देर से बनने वाले तूफानों के रूप में दर्ज थे। आधुनिक ट्रैकिंग के इतिहास में ये दोनों चक्रवात अब तक के सबसे लंबे इंतजार का पैमाना माने जाते थे। मौजूदा मौसम चक्र में अब तक निगरानी मार्गों पर इस श्रेणी का कोई भी तूफान सामने नहीं आया है।

चक्रवातों के आधिकारिक आंकड़े 1851 से उपलब्ध हैं, हालांकि उस दौर में जानकारी केवल व्यापारिक जहाजों के नाविकों द्वारा दर्ज विवरणों पर निर्भर रहती थी। इन ऐतिहासिक सीमाओं के बावजूद सभी वर्षों में तूफान दर्ज हुए, जहां पहला तूफान सबसे देर से आने का पुराना रिकॉर्ड 17 सितंबर 1941 का था।

temporada de furacão
temporada de furacão – Alones/Shutterstock.com

National Hurricane Center इस समय खुले समुद्र में केवल एक अलग-थलग विक्षोभ पर नजर रख रहा है। एजेंसी ने इसके जल्द उष्णकटिबंधीय दबाव में बदलने की संभावना को लगभग शून्य आंका है। इस कमजोर तंत्र के शक्तिशाली तूफान में तब्दील होने की उम्मीद बेहद कम है।

अटलांटिक का यह आधिकारिक सत्र नवंबर के अंत तक जारी रहेगा, जबकि अक्टूबर में आमतौर पर तीव्र चक्रवाती गतिविधियां देखी जाती हैं। इसके बावजूद पूरे सीजन में एक भी तूफान न आने की संभावना लगातार बढ़ रही है, जो इतिहास में पहली बार होगा।

तूफानों की कुल तीव्रता मापने वाला संचित चक्रवाती ऊर्जा सूचकांक ऐतिहासिक औसत के केवल 7% स्तर तक ही पहुंच पाया है। वर्ष 1950 से शुरू हुए रिकॉर्ड में इस बार का प्रदर्शन 77 वर्षों में सबसे निचले 77वें स्थान पर दर्ज हुआ। यह आंकड़ा अब तक केवल पांच बेहद हल्के तूफानों की मौजूदगी तक सीमित रहा है।

El Niño की तीव्रता से बदले समुद्री हालात और बढ़े नए खतरे

प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली El Niño के प्रसार ने अटलांटिक में तूफानों की जन्मभूमि को पूरी तरह तितर-बितर कर दिया है। प्रशांत क्षेत्र का तापमान सामान्य स्तर से लगभग 3 °C अधिक दर्ज हुआ, जिसने हवा के बहाव को बदलकर निम्न दबाव के केंद्रों को नष्ट कर दिया।

समुद्री तूफानों की कमी से तटीय इलाकों को सुरक्षित माहौल मिला है, लेकिन इसके दुष्परिणाम अन्य क्षेत्रों में गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं। सूखे की स्थिति के कारण पनामा नहर में जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाने पड़े हैं। यह पर्यावरणीय बदलाव एशिया में धान की पैदावार को प्रभावित कर खाद्यान्न की कमी का खतरा बढ़ा रहा है।

महासागरों के असामान्य रूप से गर्म होने का व्यापक प्रभाव आमतौर पर चरम घटनाओं के कुछ महीनों बाद पूरी दुनिया में उभरता है। मौसम संबंधी अनुमानों के अनुसार वर्ष 2027 पृथ्वी के इतिहास का सबसे गर्म वर्ष दर्ज हो सकता है, जब उत्तरी गोलार्ध में भीषण गर्मी पड़ेगी।

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