भारत में Central Consumer Protection Authority ने Apple द्वारा सितंबर 2024 में जारी किए गए iOS 18 ऑपरेटिंग सिस्टम के खिलाफ औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियामक संस्था इस बात का तकनीकी परीक्षण कर रही है कि क्या इस डिजिटल अपडेट की वजह से iPhone हैंडसेट के माइक्रोफोन और डिस्प्ले स्क्रीन को स्थायी नुकसान पहुंचा है। एजेंसी ने 29 जुलाई को इस संबंध में विस्तृत प्रशासनिक आदेश जारी किया था।
सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद हार्डवेयर में तकनीकी खराबी
स्क्रीन ने काम बंद कर दिया। आधिकारिक नियामक संस्था को भेजी गई तकनीकी शिकायतों के अनुसार नया ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल करते ही कई फोन की स्क्रीन पर हरी, गुलाबी और सफेद खड़ी रेखाएं दिखने लगीं और हैंडसेट के माइक्रोफोन ने आवाज पकड़ना पूरी तरह बंद कर दिया। जांच का केंद्र अब सीधे तौर पर भौतिक घटकों के खराब होने पर केंद्रित है।
स्थानीय अधिकृत सर्विस सेंटरों पर iPhone 15 का डिस्प्ले बदलने के लिए लगभग ₹ 27.900 का भारी खर्च आता है, जो R$ 1.500 के बराबर है और नए खरीदे गए फोन की कुल कीमत के एक तिहाई हिस्से से भी ज्यादा बैठता है। वित्तीय नुकसान झेलने वाले उपभोक्ताओं ने इस संबंध में सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
वारंटी नियमों और उपभोक्ता अधिकारों पर कानूनी सवाल
केंद्रीय नियामक ने Apple की मौजूदा उपभोक्ता सेवा शर्तों और वारंटी नीतियों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनी फोन के निर्माण संबंधी दोषों पर तो सुरक्षा देती है, लेकिन सॉफ्टवेयर अपडेट से होने वाले नुकसान को अपनी वारंटी से बाहर रखती है।
- डिस्प्ले पैनल पर अचानक हरी और गुलाबी लकीरों का उभरना
- माइक्रोफोन द्वारा आवाज रिकॉर्ड करने की क्षमता समाप्त होना
- कैमरा एप्लिकेशन में गंभीर रुकावट और हैंग होने की समस्या
भारतीय एजेंसी ने इस कानूनी प्रावधान को चुनौती दी है क्योंकि कंपनी द्वारा भेजे गए आधिकारिक सिस्टम अपडेट के कारण ही फोन के आंतरिक सर्किट खराब हुए हैं।
कंपनी का औपचारिक पक्ष और पिछले अदालती फैसले
Apple ने भारतीय बाजार के उपकरणों में किसी भी व्यापक तकनीकी खराबी की बात को सिरे से खारिज किया है और अधिकारियों को दिए जवाब में कहा कि iOS 18 को सार्वजनिक रिलीज से पहले कठोर परीक्षणों से गुजारा गया था, जबकि तकनीकी जानकारों के अनुसार सॉफ्टवेयर द्वारा हार्डवेयर को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में ग्राहकों को अकेला छोड़ना अनुचित है क्योंकि कंपनी का दावा है कि पूरी जांच केवल 75 औपचारिक उपभोक्ता शिकायतों पर आधारित है और सॉफ्टवेयर को वारंटी से बाहर रखना टेक उद्योग का सामान्य नियम है।
वर्ष 2024 में Kozhikode की उपभोक्ता विवाद निवारण संस्था ने Xiaomi कंपनी को एक सिस्टम अपडेट से लॉक हुए POCO M3 हैंडसेट की मरम्मत करने या पूरी राशि लौटाने का सख्त आदेश दिया था। उस मामले में अधिकृत सेवा केंद्र ने मदरबोर्ड बदलने के लिए भारी भुगतान मांगा था।
नियामक कार्रवाई और संभावित वित्तीय जुर्माना
दोष सिद्ध होने पर CCPA नियमों के उल्लंघन के आधार पर कंपनी पर कड़ा वित्तीय जुर्माना लगा सकती है। नियामक का यह कदम भारतीय बाजार में वारंटी शर्तों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अंतिम फैसले के बाद सर्विस सेंटरों द्वारा वसूली गई मरम्मत फीस वापस करनी पड़ सकती है। एजेंसी तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर अपना निर्णय सुरक्षित रखेगी।

