खगोलविदों ने खगोल भौतिकी के इतिहास में पहली बार किसी सौरमंडल से बाहर के ग्रह Beta Pictoris b के वायुमंडल से सीधे तौर पर रेडियो तरंगों का पता लगाया है। इन प्राकृतिक संकेतों की पहचान ने सौरमंडल के बाहर ग्रहीय ऑरोरा यानी ध्रुवीय ज्योति की उपस्थिति की पुष्टि की है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों को पहली बार किसी एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्र की वास्तविक तीव्रता की सीधी गणना करने में सफलता मिली है।
यह शोध 15 सितंबर 2026 को सार्वजनिक प्रीप्रिंट रिपोजिटरी arXiv पर प्रस्तुत किया गया, जिसका नेतृत्व हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के शोधकर्ता Kevin N. Ortiz Ceballos ने किया। वैज्ञानिकों की जांच ने स्पष्ट किया कि यह किसी परग्रही सभ्यता से आने वाला कृत्रिम संकेत नहीं है। यह पूरा उत्सर्जन केवल प्राकृतिक भौतिक प्रक्रियाओं के चलते पैदा हुआ है।
दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT टेलीस्कोप से चार चरणों में दर्ज हुआ उत्सर्जन
रेडियो अवलोकनों का यह महत्वपूर्ण कार्य दक्षिण अफ्रीका के उत्तरी केप प्रांत में स्थित कार्नारवोन शहर से MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया गया। शोध दल ने 2025 और 2026 के बीच चार अलग-अलग अवलोकन सत्र आयोजित किए। इस दौरान उपकरण ने ग्रह से आने वाले निरंतर उत्सर्जन के साथ-साथ तेज रेडियो पल्स भी रिकॉर्ड किए।
वैज्ञानिकों द्वारा रिकॉर्ड किए गए ये सिग्नल 0.85 से 3.5 गीगाहर्ट्ज़ (GHz) के फ्रीक्वेंसी बैंड में काम कर रहे थे और इनमें अत्यधिक चक्रीय ध्रुवीकरण देखा गया। भौतिकी में यह विशेष पैटर्न इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन मेसर अस्थिरता नामक प्रक्रिया की पहचान है। यही प्रक्रिया पृथ्वी और बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र में भी शक्तिशाली रेडियो तरंगें पैदा करती है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि संकेत मूल तारे या पड़ोसी ग्रह Beta Pictoris c से नहीं आ रहे हैं, शोधकर्ताओं ने Gaia अंतरिक्ष मिशन द्वारा सूचीबद्ध दूरस्थ क्वासरों का उपयोग आकाश में स्थिर संदर्भ बिंदुओं के रूप में किया। इस खगोलीय अंशांकन विधि ने 4.4 सिग्मा का सांख्यिकीय महत्व हासिल किया। यह स्तर साबित करता है कि रेडियो स्रोत सीधे तौर पर इसी गैसीय ग्रह पर मौजूद है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की खगोल भौतिकीविद Suzanne Aigrain ने इस खोज पर टिप्पणी करते हुए साइंस फिक्शन की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निश्चित रूप से एलियंस नहीं हैं। उनके अनुसार यह खोज अंतरिक्ष में प्राकृतिक भौतिकी को समझने का एक शानदार अवसर देती है।
बृहस्पति और पृथ्वी के मुकाबले कई गुना ताकतवर चुंबकीय सुरक्षा घेरा
दर्ज की गई रेडियो आवृत्तियों के आधार पर शोधकर्ताओं ने गणना की है कि Beta Pictoris b के जिस हिस्से से यह उत्सर्जन निकल रहा है, वहां न्यूनतम चुंबकीय क्षेत्र 1,250 गॉस तक पहुंचता है। सौरमंडल के बाहर स्थित किसी दुनिया की भौतिक प्रकृति को समझने के लिए यह पहली प्रत्यक्ष माप मानी जा रही है।
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ओरेगन विश्वविद्यालय की खगोलशास्त्री और इस शोध की सह-लेखक Yvette Cendes ने लक्ष्य को अलग करने में डेटा की सटीकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीम तारे की संभावना को खारिज कर सकती है और यह तय है कि संकेत इसी खास ग्रह से आ रहा है। आम लोगों की धारणा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब लोग बाहरी ग्रह से रेडियो संकेत की बात सुनते हैं, तो वे एलियंस के बारे में सोचते हैं, लेकिन वास्तव में यह कोई एलियन गतिविधि नहीं है।
यह परिणाम पृथ्वी के आसपास मौजूद ग्रहों के चुंबकीय स्तर की तुलना में कई गुना अधिक शक्तिशाली पाया गया है। अध्ययन में दर्ज चुंबकीय और भौतिक विशेषताओं के तुलनात्मक मानक इस प्रकार हैं:
- 1,250 गॉस: Beta Pictoris b के उत्सर्जन क्षेत्र में मापी गई न्यूनतम चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता।
- 4.3 गॉस: हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति पर दर्ज चुंबकीय क्षेत्र की औसत शक्ति।
- 0.5 गॉस: पृथ्वी की सतह पर मौजूद प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र का औसत अनुमान।
- 0.85 से 3.5 GHz: MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप द्वारा पकड़ी गई रेडियो तरंगों की आवृत्ति सीमा।
- 4.4 सिग्मा: वह सांख्यिकीय शुद्धता जो इस ग्रह को ही संकेत का प्राथमिक स्रोत साबित करती है।
- 8 से 9 घंटे: अपनी धुरी पर एक पूरा चक्कर लगाने में इस विशाल ग्रह को लगने वाला समय।
Beta Pictoris b का 8 से 9 घंटे में पूरा होने वाला तेज घूर्णन ग्रह के भीतर एक अत्यधिक तीव्र डायनेमो प्रभाव पैदा करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यही तीव्र आंतरिक मंथन समझाता है कि इस युवा गैसीय ग्रह ने इतना जबरदस्त चुंबकीय आवरण कैसे विकसित किया।
विफल प्रयासों के बाद पहली बार मिली प्रत्यक्ष रेडियो कामयाबी
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय द्वारा कई वर्षों तक किए गए निरंतर प्रयासों के बाद यह पहली पुष्ट सफलता हाथ लगी है। वर्ष 2022 में खगोलविदों ने वेरी लार्ज एरे वेधशाला का उपयोग करके आठ अन्य एक्सोप्लैनेट्स में रेडियो संकेतों की तलाश की थी, लेकिन तब कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला था।
Beta Pictoris b को पहली बार 1 जनवरी 2008 को प्रत्यक्ष इमेजिंग तकनीक द्वारा खोजा गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में भी इस ग्रह पर एक विशेष अवलोकन अभियान चलाया गया था। उस समय 250 से 500 मेगाहर्ट्ज़ (MHz) के निचले बैंड पर खोज की गई थी, जिसमें पृथ्वी के उपकरणों द्वारा कोई भी संकेत पकड़ में नहीं आया था।
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हमारे सौरमंडल में ध्रुवीय ऑरोरा से जुड़ा यह इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन मेसर उत्सर्जन पृथ्वी, शनि और बृहस्पति पर अच्छी तरह से प्रलेखित है। इनमें बृहस्पति हमारे सौर पड़ोस में प्राकृतिक रेडियो तरंगों का सबसे शक्तिशाली ग्रह स्रोत है। Beta Pictoris b का द्रव्यमान बृहस्पति से 10 से 12 गुना अधिक है, जिसके कारण वहां यह ऑरोरल प्रक्रिया हजारों गुना अधिक विशाल रूप में घटित होती है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान के प्रोफेसर Edo Berger ने दक्षिण अफ्रीका से प्राप्त डेटा का औपचारिक विश्लेषण करने वाली टीम में सह-लेखक के रूप में काम किया। उन्होंने इस विशाल गैसीय ग्रह से निकलने वाले तापीय और गैर-तापीय विकिरणों के व्यवहार की व्याख्या को अंतिम रूप देने में योगदान दिया।
अध्ययन की समीक्षा और भविष्य के खगोलीय अभियानों की रूपरेखा
रेडियो डिटेक्शन का विवरण देने वाला यह वैज्ञानिक दस्तावेज अभी arXiv रिपोजिटरी पर प्रीप्रिंट के रूप में उपलब्ध है। किसी प्रमुख अनुक्रमित पत्रिका में औपचारिक प्रकाशन से पहले यह कार्य वैज्ञानिक समुदाय द्वारा सहकर्मी समीक्षा यानी पीयर रिव्यू की प्रक्रिया से गुजरेगा।
एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्री Joe Callingham ने इस स्वतंत्र शोध की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि पीयर रिव्यू में इस परिणाम की पुष्टि हो जाती है, तो यह विज्ञान के लिए अविश्वसनीय रूप से रोमांचक और शानदार खोज साबित होगी।
खगोलविदों की टीम ने स्पष्ट किया है कि 1,250 गॉस का आंकड़ा केवल एक न्यूनतम निचली सीमा को दर्शाता है। वर्तमान उपकरण 3.5 GHz से अधिक की आवृत्तियों को नहीं माप पाए हैं, इसलिए संभव है कि इस ग्रह का वास्तविक चुंबकीय क्षेत्र इससे भी कहीं अधिक मजबूत हो। इस परियोजना का अगला चरण इसी तकनीक का विस्तार कर पृथ्वी के नजदीकी पांच तारा प्रणालियों में मौजूद सात अन्य विशाल ग्रहों का अध्ययन करना है।
