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El Niño प्रशांत महासागर क्षेत्र में 90% चरम सीमा पर पहुंचा

El Niño - Sentinel-6 Michael Freilich/NASA/NOAA
El Niño - Sentinel-6 Michael Freilich/NASA/NOAA

अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने 15 सितंबर 2026 को प्रशांत महासागर में सक्रिय El Niño के अत्यंत गंभीर श्रेणी में पहुंचने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज की। वैज्ञानिकों ने उपग्रह विश्लेषण के बाद बताया कि यह मौसमी परिघटना कम से कम 2027 की पहली छमाही तक वैश्विक जलवायु चक्र पर अपना असर दिखाएगी। समुद्री जल की सतह पर तापीय ऊर्जा का संचय लगातार नए स्तर बना रहा है।

पूर्वी भूमध्यरेखीय जलक्षेत्र में तापमान की स्थिति

दक्षिण अमेरिकी तट से लगे पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री जल का तापमान सामान्य औसत के मुकाबले 2.8 से 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक मापा गया। महासागरीय वैज्ञानिकों के अनुसार सतह का यह असामान्य गर्म फैलाव तटीय समुद्री जीवन और वायुमंडलीय संतुलन को गंभीर रूप से अस्थिर कर रहा है।

उष्णकटिबंधीय संवहन और ऊपरी हवा के बहाव में तेज परिवर्तन दर्ज किए गए। हवा का रुख बदल गया। समुद्र की तापीय विसंगतियों को आंकने वाले RONI सूचकांक ने जून से अगस्त 2026 की अवधि में 1.4 डिग्री की वृद्धि दर्ज की, जो समुद्री सतह पर लगातार बढ़ते दबाव का स्पष्ट प्रमाण है। प्रशांत बेसिन में तैनात निगरानी उपग्रह हवा के प्रवाह और जल के तापमान में होने वाले हर बदलाव का लगातार मापन कर रहे हैं।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच नए रिकॉर्ड की आशंका

संख्यात्मक पूर्वानुमान मॉडलों की ताजा गणना के मुताबिक वर्तमान मौसमी चक्र आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर दौर की बराबरी कर सकता है। यदि यह तापीय वृद्धि इसी दर से जारी रही, तो 1950 के बाद के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच समुद्र का तापमान अब तक के सभी पुराने वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ सकता है, जिसकी पुष्टि NOAA के गणना मॉडल 75 प्रतिशत संभावना के साथ कर रहे हैं।

RONI पैमाना लंबे समय से ऊंचे स्तरों पर टिका हुआ है और इसमें गिरावट का कोई संकेत फिलहाल नहीं दिखता। यह निरंतरता दर्शाती है कि महासागर के बेसिन में जमा विशाल ऊष्मा आने वाले कई महीनों तक वायुमंडल में स्थानांतरित होती रहेगी।

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 और 2016 के दौर में RONI सूचकांक कई तिमाहियों तक 2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा था। उस अवधि के सबसे गंभीर चरण में यह पैमाना 2.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वर्तमान चक्र के दौरान इस पुराने रिकॉर्ड के टूटने का औपचारिक फैसला आगामी महीनों के वास्तविक माप पर निर्भर करेगा।

दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र में दोहरे मौसमी संकट

प्रशांत महासागर की यह प्रणाली दक्षिणी गोलार्ध के वसंत, ग्रीष्म और शरद ऋतु के शुरुआती हफ्तों तक सक्रिय रहेगी। इस विशाल मौसमी तंत्र के कारण दक्षिण अमेरिकी भूभाग पर हवा और बादलों के सामान्य पैटर्न में रुकावट पैदा हो रही है।

  • दक्षिणी इलाकों में सामान्य से बहुत अधिक मूसलाधार बारिश और नदियों में बाढ़ की स्थिति
  • उत्तरी भागों में बादलों की निरंतर कमी के चलते व्यापक सूखा और गंभीर जल संकट
  • विभिन्न प्रांतों में लंबे समय तक अत्यधिक झुलसाने वाली लू का प्रकोप

उत्तरी क्षेत्रों में वर्षा की कमी से सूखे और अत्यधिक गर्मी का दायरा फैल रहा है। इसके विपरीत दक्षिणी भागों में लगातार होने वाली बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दोनों क्षेत्रों के आपदा प्रबंधन दल प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

सामान्य स्थिति में लौटने का संभावित समय

प्रशांत बेसिन में El Niño की यह हलचल कम से कम मार्च से मई 2027 के अंतराल तक सक्रिय रूप से जारी रहने का अनुमान है। समुद्र की सतह का तापमान सामान्य होकर तटस्थ स्थिति में लौटने की संभावना अप्रैल से जून 2027 की तिमाही से पहले बनती नहीं दिख रही है।

महासागरीय मॉडलों के नवीनतम अनुमानों के अनुसार उस निर्धारित समयसीमा में स्थितियां सामान्य होने की संभावना केवल 55 प्रतिशत ही है। यदि तापीय गिरावट धीमी रही तो इस मौसमी परिघटना का फैलाव वर्ष के उत्तरार्ध तक खिंच सकता है। मौसम विज्ञानियों की आगामी त्रैमासिक रिपोर्ट में इस पर नए आंकड़े प्रस्तुत किए जाएंगे।

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